
कुछ इस अदा से मुँह फेरा उसने गोया कभी देखें भी न हों बिला-शुबा तुम हसीन तो बहुत हो पर वैसी नहीं हो जिसकी तसव्वुर मैं किया कर…

मुझे थोड़ा वक़्त चाहिए ग़म ए माज़ी भुलाने के लिए खुल के मुस्कुराने के लिए तस्कीन ए दिल पाने के लिए मुझे थोड़ा वक़्त चाहिए कु…
A Poetry Lover, Content Editor in Qafas Poetry and Indian Erudite
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