कुछ इस अदा से मुँह फेरा उसने
गोया कभी देखें भी न हों

बिला-शुबा तुम हसीन तो बहुत हो
पर वैसी नहीं हो जिसकी तसव्वुर मैं किया करता हूं

आज ये दर्द कमतर होते मेरे
मैं जो ना मिलता तुझसे तो हालात बेहतर होते मेरे

~ तुफैल अहमद