
चाहता तो बच सकता था मगर कैसे बच सकता था जो बचेगा कैसे रचेगा पहले मैं झुलसा फिर धधका चिटखने लगा कराह सकता था मगर कैसे…

वो पुराने दिन वो सुहाने दिन आशिक़ाने दिन ओस की नमी में भीगे वो पुराने दिन दिन गुज़र गए हम किधर गए पीछे मुड़ के देखा पाया सब ठह…

तो मैं तुम्हारा ... अगर ये कह दो बग़ैर मेरे नहीं गुज़ारा तो मैं तुम्हारा या उस पे मब्नी कोई तअस्सुर कोई इशारा तो मैं तुम्हा…

रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं ~ मिर्ज़ा ग़ालिब

एक पहर बीत चुका हैं मैं सौ साल जी चुका हु

और कुछ भी नहीं रह जाएगा मेरे बाद मेरे कमरे में बस मेरी किताबों को क़रीने से लगाकर रखना

ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं ठीक है ख़ुद को हम बदलते हैं शुक्रिया मश्वरत का चलते हैं हो रहा हूँ मैं किस तरह बरबाद देखने वा…

मिल गया होगा कोई और उसे मुझसे बेहतर आजकल भीड़ भी तो हर तरफ़ मज़ीद होती है

उजाला कू-ब-कू है और क्या है मेरे हमराह तू है और क्या है तिरे एहसास की दस्तक हमेशा ख़यालों पर रफ़ू है और क्या है ये ख़ामो…

ये महलों ये तख़्तों ये ताजों की दुनिया ये इंसाँ के दुश्मन समाजों की दुनिया ये दौलत के भूके रिवाजों की दुनिया ये दुनिया अ…

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कुछ इस अदा से मुँह फेरा उसने गोया कभी देखें भी न हों बिला-शुबा तुम हसीन तो बहुत हो पर वैसी नहीं हो जिसकी तसव्वुर मैं किया कर…

मुझे थोड़ा वक़्त चाहिए ग़म ए माज़ी भुलाने के लिए खुल के मुस्कुराने के लिए तस्कीन ए दिल पाने के लिए मुझे थोड़ा वक़्त चाहिए कु…
A Poetry Lover, Content Editor in Qafas Poetry and Indian Erudite
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